ब्रह्मा जी

ब्रह्मा आरती

🕐सर्वश्रेष्ठ समय: ब्रह्म मुहूर्त (भोर 4-6 बजे), बसंत पंचमी पर विशेष
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आरती पाठ

जय ब्रह्मा देवा, जय ब्रह्मा देवा।
चतुर्मुख सृष्टि रचते, वेद के प्रणेता॥
जय ब्रह्मा देवा॥

चार मुख से वेद पढ़ते, चार हाथों में शोभे।
ब्रह्मांड की सृष्टि रचकर, जीव-जगत में सोहे॥
जय ब्रह्मा देवा॥

सरस्वती है शक्ति तेरी, वाणी के दाता।
हंस वाहन पर विराजत, ज्ञान के विधाता॥
जय ब्रह्मा देवा॥

पुष्कर तीर्थ में विराजत, मंदिर है तेरा।
ब्रह्म-सरोवर के तट पर, दर्शन दो मेरा॥
जय ब्रह्मा देवा॥

बसंत पंचमी को करते, भक्त तेरी सेवा।
विद्या बुद्धि वर दे प्रभु, आज दे मेरा॥
जय ब्रह्मा देवा॥

चराचर जगत बनाया, देव-दानव रचे।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, ध्यान तेरा जचे॥
जय ब्रह्मा देवा॥

जय जय ब्रह्मा विधाता, त्रिदेव में सर्जक।
आरती गावें भक्त मिलकर, जीवन-पथ के रक्षक॥
जय ब्रह्मा देवा॥

अर्थ

इस आरती में ब्रह्मा जी के चतुर्मुख स्वरूप, चारों वेदों के ज्ञान, हंस वाहन, माँ सरस्वती और पुष्कर तीर्थ का वर्णन है। बसंत पंचमी और ब्रह्म मुहूर्त में यह आरती विशेष फलदायी है।

ब्रह्मा जी — सम्पूर्ण दर्शन

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सामान्य प्रश्न

ब्रह्मा आरती gaane ka sahi samay kya hai?

ब्रह्मा आरती ke liye shreshtha samay hai: ब्रह्म मुहूर्त (भोर 4-6 बजे), बसंत पंचमी पर विशेष.

ब्रह्मा आरती ka arth kya hai?

इस आरती में ब्रह्मा जी के चतुर्मुख स्वरूप, चारों वेदों के ज्ञान, हंस वाहन, माँ सरस्वती और पुष्कर तीर्थ का वर्णन है। बसंत पंचमी और ब्रह्म मुहूर्त में यह आरती विशेष फलदायी है।

ब्रह्मा आरती kaun se devta ki aarti hai?

ब्रह्मा आरती, ब्रह्मा जी (Brahma) ki aarti hai.