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आरती पाठ
आरती श्री रामचन्द्रजी की। कीजे नाथ, हृदय उमंग, आरती श्री रामचन्द्रजी की॥ कंचन थाल सजाए, रत्न दीप जलाए। हरि हर पूजन पाए, देव मिलाप को जाए॥ आरती श्री रामचन्द्रजी की॥ कोशल राज दुलारे, जानकी के पियारे। दशरथ के अति न्यारे, राम लला हमारे॥ आरती श्री रामचन्द्रजी की॥ मनोहर रूप बखाना, शोभित धनुषवाना। पीताम्बर परिधाना, मस्तक तिलक लगाना॥ आरती श्री रामचन्द्रजी की॥ लक्ष्मण संग सिया राजे, हनुमत सेव विराजे। सब अवगुण छोड़ भाजे, भव-भय भंजन काजे॥ आरती श्री रामचन्द्रजी की॥ श्री रामचन्द्रजी की आरती, जो कोई नर गावे। सहज में भव पार हो, परम पद पावे॥ आरती श्री रामचन्द्रजी की॥
अर्थ
इस आरती में भगवान राम के कोशल राज कुमार, धनुषधारी स्वरूप, पीताम्बर वस्त्र और उनके साथ सीता-लक्ष्मण-हनुमान का वर्णन है।
राम — सम्पूर्ण दर्शन
राम आरती के साथ राम के मंत्र, चालीसा और कथा भी पढ़ें।
राम का सम्पूर्ण पृष्ठ →सामान्य प्रश्न
राम आरती gaane ka sahi samay kya hai?
राम आरती ke liye shreshtha samay hai: प्रातःकाल और सायंकाल, राम नवमी पर विशेष.
राम आरती ka arth kya hai?
इस आरती में भगवान राम के कोशल राज कुमार, धनुषधारी स्वरूप, पीताम्बर वस्त्र और उनके साथ सीता-लक्ष्मण-हनुमान का वर्णन है।
राम आरती kaun se devta ki aarti hai?
राम आरती, राम (Rama) ki aarti hai.
