सरस्वती

सरस्वती आरती

🕐सर्वश्रेष्ठ समय: बसंत पंचमी पर, प्रातःकाल अध्ययन से पहले
🪔

आरती पाठ

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥

चंद्रवदनि पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
जय सरस्वती माता॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
जय सरस्वती माता॥

देवी शरण जो आवे, उनका उद्धार करे।
पापी जन को क्षमा करे, जो सरण आवे॥
जय सरस्वती माता॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह-अज्ञान-तिमिर का, जग से नाश करो॥
जय सरस्वती माता॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
जय सरस्वती माता॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गाए।
हितकारी सुखदायी, ज्ञान भक्ति पाए॥
जय सरस्वती माता॥

अर्थ

इस आरती में माँ सरस्वती के चंद्रमुखी, कमल पर आसीन स्वरूप और उनके हाथों में वीणा, माला का वर्णन है। वे विद्या, ज्ञान और प्रकाश की दात्री हैं।