शिव

शिव आरती

🕐सर्वश्रेष्ठ समय: प्रातःकाल 6 बजे और सायंकाल 7 बजे, विशेषकर सोमवार और महाशिवरात्रि को
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आरती पाठ

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दशभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी।
त्रिपुरारि कंसारि करमाला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजत नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई जन गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अर्थ

इस आरती में भगवान शिव के विभिन्न रूपों, उनके आभूषणों, वाहनों और शक्तियों का वर्णन है। जय शिव ओंकारा का अर्थ है – शिव जी की जय हो जो ॐ के रूप में हैं।