कथा
माघ माह की शुक्ल पक्ष पंचमी को बसंत पंचमी मनाई जाती है। यह बसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है। इस दिन माँ सरस्वती का जन्म हुआ था जब ब्रह्मा जी ने ज्ञान और वाणी के लिए उन्हें प्रकट किया था। पीले रंग का विशेष महत्व है क्योंकि बसंत में सरसों के पीले फूल खिलते हैं।
महत्व
बसंत पंचमी विद्यार्थियों और शिक्षकों का पर्व है। इस दिन विद्या, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती की विशेष पूजा होती है। विद्यार्थी अपनी किताबें और कलम माँ के चरणों में रखते हैं।
पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान करके पीले वस्त्र पहनें
माँ सरस्वती की मूर्ति के सामने पुस्तकें और वाद्य यंत्र रखें
पीले फूल और पीला भोजन (केसर की खीर) अर्पित करें
सरस्वती मंत्र का 108 बार जप करें
सरस्वती वंदना और आरती करें
पाठशालाओं में सरस्वती पूजा का आयोजन करें
दिन में ज्ञान और विद्या संबंधी कार्य करें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. बसंत पंचमी कब मनाया जाता है?
उ. बसंत पंचमी माघ (जनवरी-फरवरी) माह में मनाया जाता है।
प्र. बसंत पंचमी का महत्व क्या है?
उ. बसंत पंचमी विद्यार्थियों और शिक्षकों का पर्व है। इस दिन विद्या, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती की विशेष पूजा होती है। विद्यार्थी अपनी किताबें और कलम माँ के चरणों में रखते हैं।
प्र. बसंत पंचमी की पूजा विधि क्या है?
उ. प्रातःकाल स्नान करके पीले वस्त्र पहनें फिर, माँ सरस्वती की मूर्ति के सामने पुस्तकें और वाद्य यंत्र रखें फिर, पीले फूल और पीला भोजन (केसर की खीर) अर्पित करें।
प्र. बसंत पंचमी पर कौन से मंत्र जपें?
उ. बसंत पंचमी पर सरस्वती मंत्र का जाप करना शुभ है।
