पार्वती माता

पार्वती आरती

🕐सर्वश्रेष्ठ समय: शुक्रवार और सोमवार, नवरात्र, करवाचौथ और हरतालिका तीज पर विशेष
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आरती पाठ

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता॥

हिमाचल की राजदुलारी, शिव की अर्धांगिनी।
दुर्गा काली और भवानी, तू शक्ति की रानी॥
जय पार्वती माता॥

गणेश कार्तिकेय माता, शिव संग विराजे।
कैलाश पर ध्यान धरत, जगत में राजे॥
जय पार्वती माता॥

सुहागिनें पूजें तोहे, सौभाग्य हेतु माता।
करवाचौथ व्रत करती, तू मनोरथ दाता॥
जय पार्वती माता॥

लाल चुनरी सेंदूर से, श्रृंगार सुहावे।
अखंड सुहाग का वरदान, भक्त नित पावे॥
जय पार्वती माता॥

नवरात्र में नौ रूपों में, भक्तों को दर्शन।
महिषासुर संहार करत, देव-दुख भंजन॥
जय पार्वती माता॥

जय जय उमा महेश्वरी, शंकर की जीवन।
आरती गावे जो प्रेम से, पावे सुख पावन॥
जय पार्वती माता॥

अर्थ

इस आरती में माँ पार्वती के हिमाचल-पुत्री, शिव-अर्धांगिनी और शक्ति के विभिन्न रूपों (दुर्गा, काली, भवानी) का वर्णन है। करवाचौथ और नवरात्र में उनकी विशेष पूजा की जाती है।

पार्वती माता — सम्पूर्ण दर्शन

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सामान्य प्रश्न

पार्वती आरती gaane ka sahi samay kya hai?

पार्वती आरती ke liye shreshtha samay hai: शुक्रवार और सोमवार, नवरात्र, करवाचौथ और हरतालिका तीज पर विशेष.

पार्वती आरती ka arth kya hai?

इस आरती में माँ पार्वती के हिमाचल-पुत्री, शिव-अर्धांगिनी और शक्ति के विभिन्न रूपों (दुर्गा, काली, भवानी) का वर्णन है। करवाचौथ और नवरात्र में उनकी विशेष पूजा की जाती है।

पार्वती आरती kaun se devta ki aarti hai?

पार्वती आरती, पार्वती माता (Parvati) ki aarti hai.