
पार्वती माता
शक्ति, प्रेम और भक्ति की देवी
परिचय
माँ पार्वती आदिशक्ति की मूल स्वरूप हैं और भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं। उन्हें शक्ति, गौरी, उमा, अम्बिका और अपर्णा जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। वे पर्वतराज हिमवान और मेनका की पुत्री हैं। माँ दुर्गा, काली और लक्ष्मी सभी उनके ही विभिन्न स्वरूप हैं।
कथा
पार्वती जी पूर्व जन्म में सती थीं जो अपने पिता दक्ष के यज्ञ में शिव जी का अपमान सहन न करते हुए अग्नि में कूद गई थीं। अगले जन्म में वे हिमवान की पुत्री के रूप में जन्मीं और घोर तपस्या करके शिव जी को पुनः पति रूप में प्राप्त किया। उनके इसी तप से "अपर्णा" नाम पड़ा। माँ पार्वती ने महिषासुर और अन्य असुरों के वध के लिए दुर्गा का रूप धारण किया। वे नारी शक्ति, प्रेम, करुणा और वात्सल्य की प्रतीक हैं।
महत्व
माँ पार्वती गृहस्थ जीवन की देवी हैं। उनकी उपासना से सुखी वैवाहिक जीवन, संतान प्राप्ति और परिवार में सुख-शांति मिलती है। तीज, हरतालिका तीज और गौरी तृतीया उनके प्रमुख व्रत हैं। वे माँ की ममता और नारी की शक्ति दोनों की प्रतीक हैं।
शक्तियाँ
- सृष्टि की मूल शक्ति — आदिशक्ति का स्वरूप
- दुर्गा रूप में असुरों का संहार करना
- प्रेम और करुणा से समस्त जीवों का पालन
- भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करना
- गृहस्थ जीवन में सुख और समृद्धि प्रदान करना
आशीर्वाद
- सुखी और दीर्घायु वैवाहिक जीवन
- संतान प्राप्ति और संतान का कल्याण
- परिवार में प्रेम, सौहार्द और शांति
- मनोकामनाओं की पूर्ति और बाधाओं से मुक्ति
- नारी जीवन में सुख, सौभाग्य और सम्मान
आरती
चालीसा
सामान्य प्रश्न
पार्वती जी की पूजा कब और कैसे करें?
माँ पार्वती की पूजा शुक्रवार और सोमवार को विशेष फलदायी होती है। गौरी व्रत, हरतालिका तीज और तीज पर्व पर उनकी विशेष पूजा की जाती है। पूजा में श्वेत वस्त्र, सुहाग की सामग्री (सिंदूर, बिछिया, मेहँदी) और लाल फूल चढ़ाए जाते हैं।
पार्वती और दुर्गा में क्या अंतर है?
पार्वती और दुर्गा एक ही देवी के दो रूप हैं। पार्वती शांत, गृहस्थ और करुणामयी रूप है जबकि दुर्गा असुरों के संहार के लिए धारण किया गया रौद्र रूप है। दोनों आदिशक्ति के ही अवतार हैं।
हरतालिका तीज का क्या महत्व है?
हरतालिका तीज माँ पार्वती का सबसे प्रमुख व्रत है। इस दिन सुहागन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। कुंवारी कन्याएं योग्य वर प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
माँ पार्वती का अपर्णा नाम क्यों पड़ा?
अपर्णा का अर्थ है "पत्ता न खाने वाली।" जब पार्वती जी ने शिव जी को पाने के लिए घोर तपस्या की, तो उन्होंने पहले कंद-मूल खाए, फिर पत्ते खाए और अंत में पत्ते भी छोड़ दिए। इसलिए उनका नाम अपर्णा पड़ा।
गौरी पूजा में क्या चढ़ाया जाता है?
माँ गौरी (पार्वती) की पूजा में सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, बिछिया, मेहँदी, चूड़ियाँ, लाल साड़ी या चुनरी, श्वेत फूल और लाल फूल, फल और मिठाई विशेष रूप से चढ़ाई जाती है।
