पार्वती माता

पार्वती चालीसा

Parvati Chalisa

लाभ एवं फल

सुखी और दीर्घायु वैवाहिक जीवन का आशीर्वादसंतान प्राप्ति और संतान की रक्षाहरतालिका तीज और करवाचौथ पाठ से अखंड सौभाग्यपरिवार में प्रेम, सौहार्द और शांतिबाधाओं और शत्रुओं से माँ की सुरक्षा

अर्थ

पार्वती चालीसा माँ पार्वती के सती-जन्म, शिव-तपस्या, विवाह और आदिशक्ति के विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन करती है। सुखी वैवाहिक जीवन और संतान-प्राप्ति के लिए इसका पाठ विशेष फलदायी है।

📿

चालीसा पाठ

॥ दोहा ॥
जय जय माँ पार्वती, शिव-अर्धांगिनी-रूप।
हिमगिरि की राजदुलारी, उमा-गौरी-स्वरूप॥

॥ चालीसा ॥
जय माँ पार्वती शिव-जाया।
जगत-जननी भव-दुख-हरण-काया॥१॥

हिमाचल-मेनका की संतान।
सती बनकर लिया नया जान॥२॥

घोर तपस्या शिव पाने को।
पर्ण भी छोड़ा अपर्णा बनने को॥३॥

महादेव का वरण किया तुमने।
कैलाश पर घर बसाया सुमन से॥४॥

गणेश कार्तिकेय को जनम दिया।
शक्ति-स्वरूपिणी माँ का धर्म जिया॥५॥

दुर्गा काली भवानी चंडी।
एक ही माता के रूप प्रचंडी॥६॥

महिषासुर को संहार किया।
नवरात्र में नौ रूप धरे निया॥७॥

सुहागिनें पूजें तेरे चरण।
करवाचौथ हरतालिका-आचरण॥८॥

लाल सिंदूर चुनरी सुहाए।
अखंड सौभाग्य जो माँग सजाए॥९॥

उमा सती गौरी अम्बे माता।
भक्त-मनोरथ सदा पूर्ण-दाता॥१०॥

शक्ति-पीठ में माँ का वास।
वैष्णोदेवी कामाख्या प्रकाश॥११॥

माँ की महिमा अगम अपार।
जो जन गावे बारंबार॥१२॥

॥ दोहा ॥
पार्वती-चालीसा-पाठ से, मिले सुहाग-सुख-शांति।
जन्म-जन्म में माँ की, रहे अखंड-कृपा-क्रांति॥

अन्य चालीसा

सामान्य प्रश्न

पार्वती चालीसा ke kya fayde hain?

सुखी और दीर्घायु वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद, संतान प्राप्ति और संतान की रक्षा, हरतालिका तीज और करवाचौथ पाठ से अखंड सौभाग्य, परिवार में प्रेम, सौहार्द और शांति, बाधाओं और शत्रुओं से माँ की सुरक्षा.

पार्वती चालीसा ka arth kya hai?

पार्वती चालीसा माँ पार्वती के सती-जन्म, शिव-तपस्या, विवाह और आदिशक्ति के विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन करती है। सुखी वैवाहिक जीवन और संतान-प्राप्ति के लिए इसका पाठ विशेष फलदायी है।

पार्वती चालीसा mein kitni chaupaiyan hain?

पार्वती चालीसा mein 40 chaupaiyan hain. "Chalisa" shabd ka arth hi 40 hota hai.

पार्वती चालीसा padhne ka sahi samay kya hai?

पार्वती चालीसा subah snaan ke baad ya sham ko diya jalane ke baad padhna shubh maana jata hai.

पार्वती माता — सम्पूर्ण दर्शन

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