प्रत्येक माह (शुक्ल और कृष्ण पक्ष)

एकादशी

Ekadashi

कथा

हर माह की एकादशी (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने एकादशी देवी के रूप में मुर नामक राक्षस का वध किया था। वर्ष में 24 एकादशी होती हैं जिनमें देवशयनी एकादशी (आषाढ़) और देवोत्थानी एकादशी (कार्तिक) का विशेष महत्व है।

महत्व

एकादशी व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह मोक्ष देने वाला व्रत माना जाता है। निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल) सबसे कठिन और फलदायी एकादशी है।

पूजा विधि

  1. दशमी से ही सात्विक आहार लेना शुरू करें

  2. एकादशी को निर्जल या फलाहार व्रत रखें

  3. विष्णु सहस्रनाम और विष्णु स्तोत्र का पाठ करें

  4. तुलसी माला पर विष्णु नाम का जप करें

  5. रात्रि जागरण करें और भजन-कीर्तन करें

  6. द्वादशी को ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत खोलें

  7. दान-पुण्य और गोसेवा करें

संबंधित देवी-देवता

इस पर्व के मंत्र

विष्णु सहस्रनाम

Vishnu Sahasranam

विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः। भूतकृद् भूतभृद् भावो भूतात्मा भूतभावनः॥ पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः। अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥ (संपूर्ण सहस्रनाम – 108 श्लोक)

भगवान विष्णु के 1000 नामों का पाठ करके सर्वोच्च कृपा और मोक्ष प्राप्ति

ॐ नमो नारायणाय

Om Namo Narayanaya

ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

भगवान विष्णु/नारायण की आराधना और सर्वोच्च कृपा प्राप्ति

गायत्री मंत्र

Gayatri Mantra

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

सर्वोच्च बुद्धि, ज्ञान और आत्मप्रकाश की प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ वैदिक मंत्र

इस पर्व से जुड़े मंदिर