सूर्य देव

नवग्रह आरती

🕐सर्वश्रेष्ठ समय: शनिवार को, नवग्रह पूजा या ग्रह-शांति यज्ञ के अवसर पर
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आरती पाठ

जय नवग्रह देवा, जय नवग्रह देवा।
सूर्य-चंद्र-मंगल-बुध, गुरु-शुक्र-शनि-सेवा॥
जय नवग्रह देवा॥

सूर्य प्रथम नवग्रह स्वामी, जगत के नेत्र।
रवि-किरणों से जगमगाए, धरती-अंतरिक्ष-क्षेत्र॥
जय नवग्रह देवा॥

चंद्रमा मन का देवता, रात का उजियारा।
सोम-व्रत रखकर भक्त, पावे सुख दुलारा॥
जय नवग्रह देवा॥

मंगल शक्ति साहस दाता, भौम-मंगलकारी।
मंगलवार को लाल-वस्त्र, हनुमत-पूजन भारी॥
जय नवग्रह देवा॥

बुध वाणी बुद्धि के दाता, बुधवार पूजन।
हरे वस्त्र मूँग अर्पण, पावे शुभ-जीवन॥
जय नवग्रह देवा॥

गुरु ज्ञान धर्म के दाता, बृहस्पति देवा।
पीले वस्त्र चना-दाल से, पावे भक्त मेवा॥
जय नवग्रह देवा॥

शुक्र सौंदर्य समृद्धि दाता, शुक्रवार पूजन।
राहु केतु छाया-ग्रह, करें दोष-शमन॥
जय नवग्रह देवा॥

शनि न्याय और कर्म के देवता, शनिचर-भगवान।
तेल-काले-तिल अर्पण, करें भक्त कल्याण॥
जय नवग्रह देवा॥

नवग्रह शांति पाठ जो करे, होवे ग्रह-मुक्त।
आरती गावे श्रद्धा से, रहे सदा युक्त॥
जय नवग्रह देवा॥

अर्थ

नवग्रह आरती में नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की महिमा, उनके वार, रंग और अर्पण सामग्री का वर्णन है। इस आरती से समस्त ग्रह-दोष शांत होते हैं।

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सामान्य प्रश्न

नवग्रह आरती gaane ka sahi samay kya hai?

नवग्रह आरती ke liye shreshtha samay hai: शनिवार को, नवग्रह पूजा या ग्रह-शांति यज्ञ के अवसर पर.

नवग्रह आरती ka arth kya hai?

नवग्रह आरती में नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की महिमा, उनके वार, रंग और अर्पण सामग्री का वर्णन है। इस आरती से समस्त ग्रह-दोष शांत होते हैं।

नवग्रह आरती kaun se devta ki aarti hai?

नवग्रह आरती, सूर्य देव (Surya Dev) ki aarti hai.