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आरती पाठ
जय नवग्रह देवा, जय नवग्रह देवा। सूर्य-चंद्र-मंगल-बुध, गुरु-शुक्र-शनि-सेवा॥ जय नवग्रह देवा॥ सूर्य प्रथम नवग्रह स्वामी, जगत के नेत्र। रवि-किरणों से जगमगाए, धरती-अंतरिक्ष-क्षेत्र॥ जय नवग्रह देवा॥ चंद्रमा मन का देवता, रात का उजियारा। सोम-व्रत रखकर भक्त, पावे सुख दुलारा॥ जय नवग्रह देवा॥ मंगल शक्ति साहस दाता, भौम-मंगलकारी। मंगलवार को लाल-वस्त्र, हनुमत-पूजन भारी॥ जय नवग्रह देवा॥ बुध वाणी बुद्धि के दाता, बुधवार पूजन। हरे वस्त्र मूँग अर्पण, पावे शुभ-जीवन॥ जय नवग्रह देवा॥ गुरु ज्ञान धर्म के दाता, बृहस्पति देवा। पीले वस्त्र चना-दाल से, पावे भक्त मेवा॥ जय नवग्रह देवा॥ शुक्र सौंदर्य समृद्धि दाता, शुक्रवार पूजन। राहु केतु छाया-ग्रह, करें दोष-शमन॥ जय नवग्रह देवा॥ शनि न्याय और कर्म के देवता, शनिचर-भगवान। तेल-काले-तिल अर्पण, करें भक्त कल्याण॥ जय नवग्रह देवा॥ नवग्रह शांति पाठ जो करे, होवे ग्रह-मुक्त। आरती गावे श्रद्धा से, रहे सदा युक्त॥ जय नवग्रह देवा॥
अर्थ
नवग्रह आरती में नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की महिमा, उनके वार, रंग और अर्पण सामग्री का वर्णन है। इस आरती से समस्त ग्रह-दोष शांत होते हैं।
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नवग्रह आरती gaane ka sahi samay kya hai?
नवग्रह आरती ke liye shreshtha samay hai: शनिवार को, नवग्रह पूजा या ग्रह-शांति यज्ञ के अवसर पर.
नवग्रह आरती ka arth kya hai?
नवग्रह आरती में नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की महिमा, उनके वार, रंग और अर्पण सामग्री का वर्णन है। इस आरती से समस्त ग्रह-दोष शांत होते हैं।
नवग्रह आरती kaun se devta ki aarti hai?
नवग्रह आरती, सूर्य देव (Surya Dev) ki aarti hai.
