सूर्य देव
जगत के नेत्र, आरोग्य और ऊर्जा के देवता
परिचय
भगवान सूर्य नवग्रहों में सर्वप्रमुख हैं और समस्त जीवन के आधार हैं। वे ऊर्जा, ज्ञान, आरोग्य और आत्मा के प्रतीक हैं। उन्हें जगत की आँखें (जगत्चक्षु) कहा जाता है। सूर्यदेव का रथ सात अश्वों से खिंचता है जो सात रंगों और सात दिनों के प्रतीक हैं।
कथा
सूर्यदेव महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं। उनकी पत्नी संज्ञा और छाया हैं। संज्ञा से यम, यमुना और वैवस्वत मनु का जन्म हुआ। छाया से शनि देव और तपती का जन्म हुआ। महाभारत में कर्ण सूर्यपुत्र हैं। वानर राज सुग्रीव भी सूर्यपुत्र हैं। भगवान राम के सहायक के रूप में उनका उल्लेख रामायण में है। छठ पूजा, रथसप्तमी और मकर संक्रांति सूर्य को समर्पित प्रमुख पर्व हैं।
महत्व
सूर्य उपासना हिंदू धर्म की प्राचीनतम पूजा परंपराओं में से एक है। वेदों में सूर्य की अनेक ऋचाएं हैं। सूर्य नमस्कार शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है। आरोग्य, नेत्र ज्योति और सफलता के लिए सूर्य उपासना विशेष फलदायी है।
शक्तियाँ
- समस्त जीव-जगत को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करना
- रोग और अंधकार को नष्ट करना
- आत्मज्ञान और विवेक प्रदान करना
- नवग्रहों में राजा के रूप में ग्रह दोषों का निवारण
- कालचक्र का संचालन करना
आशीर्वाद
- नेत्र रोगों और त्वचा रोगों से मुक्ति
- सरकारी कार्यों में सफलता और प्रतिष्ठा
- आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता
- शत्रुओं पर विजय
- पिता और वरिष्ठ जनों से आशीर्वाद
प्रमुख मंत्र
सूर्य मंत्र
ॐ सूर्याय नमः ॐ घृणि सूर्य आदित्यः सूर्य द्वादश नाम मंत्र:…
आरोग्य, नेत्र-ज्योति, सरकारी सफलता और सूर्य देव की कृपा के लिए
शनि मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः शनि बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शन…
शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति और शनिदेव की कृपा के लिए
नवग्रह मंत्र
नवग्रह शांति मंत्र: ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी, भानुः…
नौ ग्रहों की शांति, कुंडली के ग्रह-दोष निवारण और सर्वांगीण कल्याण के लिए
आरती
चालीसा
सामान्य प्रश्न
सूर्य देव को अर्घ्य कैसे दें?
तांबे के लोटे में जल लें और उसमें लाल चंदन, लाल फूल और थोड़ा दूध मिलाएं। उगते सूर्य की ओर मुँह करके दोनों हाथों से धीरे-धीरे जल चढ़ाएं। इस दौरान गायत्री मंत्र या "ॐ सूर्याय नमः" का जप करें।
सूर्य नमस्कार का मंत्र क्या है?
सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र हैं: ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः।
रविवार को सूर्य पूजा कैसे करें?
रविवार को सूर्योदय के समय स्नान करके लाल वस्त्र पहनें। तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन और लाल फूल मिलाकर अर्घ्य दें। आदित्य हृदयम या गायत्री मंत्र का पाठ करें। इस दिन नमक का त्याग करना शुभ है।
सूर्य ग्रहण में कौन सा मंत्र जपें?
सूर्य ग्रहण के समय "ॐ आदित्याय नमः" या "ॐ घृणि सूर्य आदित्यः" मंत्र का जप करना चाहिए। गायत्री मंत्र भी अत्यंत फलदायी है। ग्रहण के बाद स्नान करके पूजा करें।
छठ पूजा में सूर्य को क्यों पूजा जाता है?
छठ पूजा एकमात्र वैदिक पर्व है जिसमें अस्त होते सूर्य को भी पूजा जाता है। यह इस विचार पर आधारित है कि जीवन देने वाले को कठिन समय में भी धन्यवाद दिया जाए। सूर्य जीवन, ऊर्जा और समृद्धि के स्रोत हैं।
