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आरती पाठ
ॐ जय सूर्य भगवान, जय जय सूर्य भगवान। जगत के दीपक हो प्रभु, तेज के दातारान॥ ॐ जय सूर्य भगवान॥ सप्त अश्वों के स्वामी, अरुण सारथी साजे। रथ पर दिव्य विराजत, उषा संग जब आजे॥ ॐ जय सूर्य भगवान॥ कश्यप-अदिति के नंदन, सूर्य-नारायण। भानु, रवि, आदित्य, भास्कर, जगत-जीवन॥ ॐ जय सूर्य भगवान॥ गायत्री मंत्र से करते, जो भक्त तुम्हें याद। रोग-दोष सब नाशे, होवे मनोहलाद॥ ॐ जय सूर्य भगवान॥ छठ पूजा में आते, अर्घ्य देते भक्त। पूर्व दिशा से निकलते, होते पाप-मुक्त॥ ॐ जय सूर्य भगवान॥ सूर्य नमस्कार करते, जो प्रतिदिन उठाय। निरोगी काया पाते, शत्रु नहीं सताय॥ ॐ जय सूर्य भगवान॥ जय जय सूर्य नारायण, जगत के रक्षक। आरती जो नर गावे, पावे सुख अभिलाषक॥ ॐ जय सूर्य भगवान॥
अर्थ
इस आरती में सूर्यदेव के सप्त-अश्व रथ, उनके द्वादश नाम (भानु, रवि, आदित्य, भास्कर आदि), छठ पूजा में अर्घ्य की परंपरा और सूर्य नमस्कार की महिमा का वर्णन है। प्रतिदिन सूर्य आरती से रोग-दोष नष्ट होते हैं।
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सूर्य देव — सम्पूर्ण दर्शन
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सूर्य देव का सम्पूर्ण पृष्ठ →सामान्य प्रश्न
सूर्य आरती gaane ka sahi samay kya hai?
सूर्य आरती ke liye shreshtha samay hai: प्रातःकाल सूर्योदय के समय, रविवार और छठ पूजा पर विशेष.
सूर्य आरती ka arth kya hai?
इस आरती में सूर्यदेव के सप्त-अश्व रथ, उनके द्वादश नाम (भानु, रवि, आदित्य, भास्कर आदि), छठ पूजा में अर्घ्य की परंपरा और सूर्य नमस्कार की महिमा का वर्णन है। प्रतिदिन सूर्य आरती से रोग-दोष नष्ट होते हैं।
सूर्य आरती kaun se devta ki aarti hai?
सूर्य आरती, सूर्य देव (Surya Dev) ki aarti hai.
