सूर्य देव

सूर्य आरती

🕐सर्वश्रेष्ठ समय: प्रातःकाल सूर्योदय के समय, रविवार और छठ पूजा पर विशेष
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आरती पाठ

ॐ जय सूर्य भगवान, जय जय सूर्य भगवान।
जगत के दीपक हो प्रभु, तेज के दातारान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

सप्त अश्वों के स्वामी, अरुण सारथी साजे।
रथ पर दिव्य विराजत, उषा संग जब आजे॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

कश्यप-अदिति के नंदन, सूर्य-नारायण।
भानु, रवि, आदित्य, भास्कर, जगत-जीवन॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

गायत्री मंत्र से करते, जो भक्त तुम्हें याद।
रोग-दोष सब नाशे, होवे मनोहलाद॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

छठ पूजा में आते, अर्घ्य देते भक्त।
पूर्व दिशा से निकलते, होते पाप-मुक्त॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

सूर्य नमस्कार करते, जो प्रतिदिन उठाय।
निरोगी काया पाते, शत्रु नहीं सताय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

जय जय सूर्य नारायण, जगत के रक्षक।
आरती जो नर गावे, पावे सुख अभिलाषक॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

अर्थ

इस आरती में सूर्यदेव के सप्त-अश्व रथ, उनके द्वादश नाम (भानु, रवि, आदित्य, भास्कर आदि), छठ पूजा में अर्घ्य की परंपरा और सूर्य नमस्कार की महिमा का वर्णन है। प्रतिदिन सूर्य आरती से रोग-दोष नष्ट होते हैं।

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सामान्य प्रश्न

सूर्य आरती gaane ka sahi samay kya hai?

सूर्य आरती ke liye shreshtha samay hai: प्रातःकाल सूर्योदय के समय, रविवार और छठ पूजा पर विशेष.

सूर्य आरती ka arth kya hai?

इस आरती में सूर्यदेव के सप्त-अश्व रथ, उनके द्वादश नाम (भानु, रवि, आदित्य, भास्कर आदि), छठ पूजा में अर्घ्य की परंपरा और सूर्य नमस्कार की महिमा का वर्णन है। प्रतिदिन सूर्य आरती से रोग-दोष नष्ट होते हैं।

सूर्य आरती kaun se devta ki aarti hai?

सूर्य आरती, सूर्य देव (Surya Dev) ki aarti hai.