Hanuman — बजरंगबली, राम भक्त शिरोमणि
देवता

हनुमान

बजरंगबली, राम भक्त शिरोमणि

परिचय

भगवान हनुमान अनंत बल और भक्ति के प्रतीक हैं। वे रुद्र के अवतार हैं और राम जी के परम भक्त हैं। हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी संकट दूर करते हैं।

कथा

हनुमान जी का जन्म माता अंजना और केसरी के यहाँ हुआ। वे पवन देव के पुत्र हैं इसलिए पवनपुत्र भी कहलाते हैं। बाल्यकाल में सूर्य को फल समझकर खाने चले तो इंद्र ने वज्र से प्रहार किया जिससे उनकी हनु (जबड़ा) टूट गई, इसीलिए हनुमान नाम पड़ा। राम-रावण युद्ध में उन्होंने लंका जाकर सीता जी का पता लगाया, लंका दहन किया और संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए। हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास ने उनकी महिमा का वर्णन किया है। वे चिरंजीवी हैं और आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं।

महत्व

हनुमान जी शक्ति, भक्ति और बुद्धि के त्रिवेणी संगम हैं। उनकी पूजा से भय, रोग और शत्रु सभी दूर भागते हैं। वे कलियुग के जागृत देवता हैं।

शक्तियाँ

  • अष्ट सिद्धि और नव निधि का स्वामित्व
  • पर्वत उखाड़ने जितना अनंत बल
  • आकाश में उड़ने और रूप बदलने की शक्ति
  • अमरत्व और अजेयता का वरदान
  • भक्तों के सभी संकट और भूत-प्रेत बाधाओं को दूर करने की शक्ति

आशीर्वाद

  • भय और कायरता से मुक्ति
  • शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि
  • नकारात्मक शक्तियों और भूत-प्रेत से सुरक्षा
  • बुद्धि, विद्या और विवेक की प्राप्ति
  • सभी प्रकार के संकटों से रक्षा

प्रमुख मंत्र

आरती

चालीसा

सामान्य प्रश्न

हनुमान जी को संकट मोचन क्यों कहते हैं?

हनुमान जी अपने भक्तों के सभी संकट, कष्ट और बाधाओं को दूर करते हैं। हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी ने लिखा है कि जो हनुमान जी का नाम लेता है, उस पर कोई संकट नहीं आता।

मंगलवार और शनिवार को हनुमान पूजा क्यों होती है?

मंगलवार हनुमान जी का प्रिय दिन है क्योंकि इस दिन उनका जन्म हुआ था। शनिवार को भी उनकी पूजा होती है क्योंकि उन्होंने शनिदेव को लंका में पराजित किया था।

हनुमान चालीसा का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय दूर होता है, नकारात्मक शक्तियाँ दूर भागती हैं, मन को शांति मिलती है और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हनुमान जी चिरंजीवी क्यों हैं?

सीता जी ने हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान दिया था। भगवान राम ने भी कहा था कि जब तक रामकथा चलती रहेगी, हनुमान जी पृथ्वी पर विद्यमान रहेंगे।

बजरंग बाण का पाठ कब करें?

बजरंग बाण का पाठ विशेष संकट के समय किया जाता है। इसे मंगलवार या शनिवार को करने से विशेष फल मिलता है। हनुमान जी की मूर्ति के सामने दीपक जलाकर इसका पाठ करें।