कथा
चैत्र माह की पूर्णिमा को (कुछ मान्यताओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को) भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। उनकी माता अंजना और पिता केसरी थे। वे वायुदेव के वरदान से जन्मे इसलिए पवनपुत्र कहलाते हैं। बाल्यकाल में उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की थी।
महत्व
हनुमान जयंती पर हनुमान भक्त विशेष पूजा, उपवास और हनुमान चालीसा पाठ करते हैं। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
पूजा विधि
प्रातःकाल उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र पहनें
हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं
हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें
बजरंगबाण और हनुमान आरती पढ़ें
उपवास रखें और फलाहार करें
हनुमान मंदिर जाएं और सुंदरकांड का पाठ करें
गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
हनुमान मूल मंत्र
Hanuman Moola Mantraॐ हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा
हनुमान जी की कृपा और सभी संकटों से मुक्ति के लिए
बजरंग बाण
Bajrang Baanनिश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करें सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान॥ जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै॥ जैसे कूदि सिंधु महि पारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥ आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥
अत्यंत कठिन संकट, बुरी शक्तियों और असाध्य समस्याओं के निवारण के लिए
इस पर्व से जुड़े मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. हनुमान जयंती कब मनाया जाता है?
उ. हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा (अप्रैल) माह में मनाया जाता है।
प्र. हनुमान जयंती का महत्व क्या है?
उ. हनुमान जयंती पर हनुमान भक्त विशेष पूजा, उपवास और हनुमान चालीसा पाठ करते हैं। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
प्र. हनुमान जयंती की पूजा विधि क्या है?
उ. प्रातःकाल उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र पहनें फिर, हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं फिर, हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें।
प्र. हनुमान जयंती पर कौन से मंत्र जपें?
उ. हनुमान जयंती पर हनुमान मूल मंत्र, बजरंग बाण का जाप करना शुभ है।
