चैत्र पूर्णिमा (अप्रैल)

हनुमान जयंती

Hanuman Jayanti

कथा

चैत्र माह की पूर्णिमा को (कुछ मान्यताओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को) भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। उनकी माता अंजना और पिता केसरी थे। वे वायुदेव के वरदान से जन्मे इसलिए पवनपुत्र कहलाते हैं। बाल्यकाल में उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की थी।

महत्व

हनुमान जयंती पर हनुमान भक्त विशेष पूजा, उपवास और हनुमान चालीसा पाठ करते हैं। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

पूजा विधि

  1. प्रातःकाल उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र पहनें

  2. हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं

  3. हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें

  4. बजरंगबाण और हनुमान आरती पढ़ें

  5. उपवास रखें और फलाहार करें

  6. हनुमान मंदिर जाएं और सुंदरकांड का पाठ करें

  7. गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. हनुमान जयंती कब मनाया जाता है?

उ. हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा (अप्रैल) माह में मनाया जाता है।

प्र. हनुमान जयंती का महत्व क्या है?

उ. हनुमान जयंती पर हनुमान भक्त विशेष पूजा, उपवास और हनुमान चालीसा पाठ करते हैं। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

प्र. हनुमान जयंती की पूजा विधि क्या है?

उ. प्रातःकाल उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र पहनें फिर, हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं फिर, हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें।

प्र. हनुमान जयंती पर कौन से मंत्र जपें?

उ. हनुमान जयंती पर हनुमान मूल मंत्र, बजरंग बाण का जाप करना शुभ है।