कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (नवंबर)

गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja (Annakut)

गोवर्धन पूजा 2026 तिथि और मुहूर्त

📅 10 नवंबर 2026, मंगलवार

  • • प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक (नई दिल्ली)
  • • जयपुर जैसे कुछ शहरों के पंचांग में यह 9 नवंबर को है — अपने शहर का पंचांग देखें

मुहूर्त का समय शहर के अनुसार बदलता है — सटीक समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।

कथा

द्वापर युग में ब्रजवासी हर वर्ष वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। बालक श्री कृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमारी गायों और खेतों का पालन गोवर्धन पर्वत करता है, इसलिए उसी की पूजा होनी चाहिए। ब्रजवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की। क्रोधित इंद्र ने सात दिन तक मूसलाधार वर्षा की। तब श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों और पशुओं को उसके नीचे शरण दी। इंद्र का घमंड टूटा और उन्होंने श्री कृष्ण से क्षमा माँगी।

महत्व

गोवर्धन पूजा दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होती है। इसे अन्नकूट भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन भगवान को 56 भोग (छप्पन भोग) लगाए जाते हैं। यह पर्व प्रकृति, गौ-माता और अन्न के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। मथुरा-वृंदावन और गोवर्धन में इसकी विशेष धूम रहती है।

पूजा विधि

  1. प्रातःकाल स्नान करके घर के आँगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं

  2. गोवर्धन को फूल, रोली, अक्षत और दीपक से सजाएं

  3. श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज को अन्नकूट (छप्पन भोग) का भोग लगाएं

  4. गोवर्धन की सात बार परिक्रमा करें

  5. गायों और बैलों को स्नान कराकर तिलक लगाएं और गुड़-चावल खिलाएं

  6. गोवर्धन पूजा की कथा सुनें और श्री कृष्ण की आरती करें

  7. अन्नकूट का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें

संबंधित देवी-देवता

इस पर्व के मंत्र

इस पर्व से जुड़े मंदिर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. गोवर्धन पूजा 2026 कब है?

उ. गोवर्धन पूजा 2026 में 10 नवंबर 2026, मंगलवार को है। प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक (नई दिल्ली)। जयपुर जैसे कुछ शहरों के पंचांग में यह 9 नवंबर को है — अपने शहर का पंचांग देखें।

प्र. गोवर्धन पूजा का महत्व क्या है?

उ. गोवर्धन पूजा दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होती है। इसे अन्नकूट भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन भगवान को 56 भोग (छप्पन भोग) लगाए जाते हैं। यह पर्व प्रकृति, गौ-माता और अन्न के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। मथुरा-वृंदावन और गोवर्धन में इसकी विशेष धूम रहती है।

प्र. गोवर्धन पूजा की पूजा विधि क्या है?

उ. प्रातःकाल स्नान करके घर के आँगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं फिर, गोवर्धन को फूल, रोली, अक्षत और दीपक से सजाएं फिर, श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज को अन्नकूट (छप्पन भोग) का भोग लगाएं।

प्र. गोवर्धन पूजा पर कौन से मंत्र जपें?

उ. गोवर्धन पूजा पर हरे कृष्ण महामंत्र, गोविंद नाम का जाप करना शुभ है।