आश्विन (अक्टूबर) / चैत्र (मार्च-अप्रैल)

नवरात्रि

Navratri

कथा

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। पुराणों के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं को परास्त करके स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। सभी देवताओं ने मिलकर माँ दुर्गा का आह्वान किया। माँ दुर्गा ने नौ दिनों के भीषण युद्ध के बाद दसवें दिन (विजयदशमी) महिषासुर का वध किया।

महत्व

नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है: चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (अक्टूबर)। शारदीय नवरात्रि अधिक प्रसिद्ध है। इन नौ दिनों में माँ के नौ स्वरूपों की पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

पूजा विधि

  1. घट स्थापना: पवित्र मिट्टी में जौ बोएं और कलश स्थापित करें

  2. प्रतिदिन माँ दुर्गा के एक रूप की विशेष पूजा करें

  3. उपवास रखें और सात्विक आहार लें

  4. दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें

  5. कन्या पूजन (नवमी को 9 कन्याओं को भोजन कराएं)

  6. जागरण और भजन-कीर्तन करें

  7. विजयदशमी पर शस्त्र पूजा और रावण दहन

संबंधित देवी-देवता

इस पर्व के मंत्र

दुर्गा मंत्र

Durga Mantra

ॐ दुं दुर्गायै नमः सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

माँ दुर्गा की शक्ति प्राप्ति और समस्त बाधाओं के नाश के लिए

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र

Mahishasura Mardini Stotra

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते। भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शंकरतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते। दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

माँ दुर्गा की असुर नाशक शक्ति का आह्वान और नकारात्मकता का नाश

इस पर्व से जुड़े मंदिर