इतिहास
कामाख्या मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे नीलाचल पर्वत पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में सर्वोच्च माना जाता है। पुराणों के अनुसार, यहाँ माँ सती की योनि (गर्भ) गिरी थी। यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है बल्कि एक प्राकृतिक पत्थर की आकृति है।
महत्व
कामाख्या मंदिर तांत्रिक साधना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। आंबुवाची मेला (जून में) यहाँ का प्रमुख उत्सव है जब देवी रजस्वला होती हैं और मंदिर 3 दिन बंद रहता है। यहाँ की माँ भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूरी करती हैं।
वास्तुकला
मंदिर असमिया और बंगाली स्थापत्य कला का मिश्रण है। मंदिर का शिखर मधुमक्खी के छत्ते के आकार का है। गुफानुमा गर्भगृह में प्राकृतिक जलस्रोत है।
यहाँ के प्रमुख मंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. कामाख्या मंदिर कहाँ स्थित है?
उ. कामाख्या मंदिर गुवाहाटी, नीलाचल पर्वत, असम में स्थित है।
प्र. कामाख्या मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
उ. प्रातः 5:30 बजे से दोपहर 1 बजे और दोपहर 2:30 से शाम 5:30 बजे तक
प्र. कामाख्या मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कब है?
उ. नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समय। आंबुवाची मेला (जून) में विशेष।
प्र. कामाख्या मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उ. कामाख्या मंदिर तांत्रिक साधना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। आंबुवाची मेला (जून में) यहाँ का प्रमुख उत्सव है जब देवी रजस्वला होती हैं और मंदिर 3 दिन बंद रहता है। यहाँ की माँ भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूरी करती हैं।
प्र. कामाख्या मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?
उ. कामाख्या मंदिर में दुर्गा (Durga) की पूजा होती है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।
प्र. कामाख्या मंदिर में कौन से त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं?
उ. नवरात्रि के समय कामाख्या मंदिर में विशेष पूजा और भारी भीड़ होती है।

