श्रावण पूर्णिमा (अगस्त)

रक्षाबंधन

Raksha Bandhan

कथा

श्रावण माह की पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत में द्रौपदी ने श्री कृष्ण की उँगली पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बाँधा था। बदले में कृष्ण ने उन्हें जीवनभर रक्षा का वचन दिया। एक अन्य कथा इंद्र देव और उनकी पत्नी की है जिसमें देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र की पत्नी को रक्षा सूत्र बाँधकर विजय दिलाई थी।

महत्व

रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती है। भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। यह पर्व रक्षा, प्रेम और विश्वास का त्रिकोण है।

पूजा विधि

  1. थाली में राखी, कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई सजाएं

  2. भाई को पूर्व दिशा में बैठाएं

  3. भाई के माथे पर तिलक लगाएं

  4. आरती करें और अक्षत छिड़कें

  5. राखी बाँधते हुए मंत्र पढ़ें: "येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।"

  6. भाई को मिठाई खिलाएं

  7. भाई अपनी इच्छानुसार उपहार और आशीर्वाद दें

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इस पर्व के मंत्र

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