
गणेश
विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य
परिचय
भगवान गणेश विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति हैं। वे शिव और पार्वती के पुत्र हैं और हर शुभ कार्य में सबसे पहले पूजे जाते हैं। उनका गजमुख और लंबोदर शरीर उनकी विशिष्ट पहचान है।
कथा
माता पार्वती ने स्नान से पहले अपने शरीर की मैल से गणेश जी को बनाया और द्वार पर पहरा देने को कहा। जब शिव जी आए तो गणेश जी ने रोका, क्रोधित शिव जी ने उनका सिर काट दिया। पार्वती जी के विलाप पर शिव जी ने गणेश जी के सिर पर हाथी का सिर लगाकर उन्हें जीवित किया। देवताओं ने उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय होने का वरदान दिया। गणपति उत्सव में महाराष्ट्र में बड़े धूमधाम से उनकी पूजा होती है। उनके 21 नाम और 8 प्रमुख रूप (अष्टविनायक) प्रसिद्ध हैं।
महत्व
गणेश जी विघ्नहर्ता हैं - वे अपने भक्तों के सभी विघ्न और बाधाएं दूर करते हैं। कोई भी शुभ कार्य गणेश पूजा के बिना शुरू नहीं होता।
शक्तियाँ
- विघ्नों और बाधाओं को दूर करने की शक्ति
- बुद्धि, विवेक और ज्ञान प्रदान करना
- अंकुश से मन को नियंत्रित करने की शक्ति
- मूषक वाहन से सूक्ष्म रहस्यों को जानने की शक्ति
- गज बल से शत्रुओं और नकारात्मकता को परास्त करना
आशीर्वाद
- नए कार्यों की शुरुआत में सफलता
- बाधाओं और विघ्नों से मुक्ति
- बुद्धि, विद्या और विवेक की प्राप्ति
- धन, समृद्धि और मांगलिक कार्यों में सफलता
- परिवार में सुख, शांति और सद्भाव
प्रमुख मंत्र
आरती
चालीसा
सामान्य प्रश्न
गणेश जी का सिर हाथी का क्यों है?
माँ पार्वती ने गणेश जी को बनाया था और द्वार पर पहरा देने को कहा। जब शिव जी आए तो गणेश जी ने रोका। क्रोधित शिव जी ने उनका सिर काट दिया। पार्वती जी के विलाप पर शिव जी ने हाथी का सिर लगाकर उन्हें जीवित किया।
गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया।
गणेश जी को मोदक क्यों प्रिय हैं?
मोदक का अर्थ है "जो आनंद देता है"। माँ पार्वती ने गणेश जी के लिए मोदक बनाए थे। यह बौद्धिक आनंद और आत्मिक खुशी का प्रतीक है।
बुधवार को गणेश पूजा क्यों होती है?
बुधवार का ग्रह बुध है जो बुद्धि और विवेक का कारक है। गणेश जी भी बुद्धि के देवता हैं, इसलिए बुधवार को उनकी पूजा विशेष फलदायी होती है।
अष्टविनायक क्या हैं?
अष्टविनायक गणेश जी के आठ पवित्र मंदिर हैं जो महाराष्ट्र में स्थित हैं: मोरगांव, सिद्धटेक, पाली, महड़, थेऊर, लेण्याद्री, ओझर और रांजणगांव। इनकी यात्रा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
