इतिहास
अष्टविनायक महाराष्ट्र में गणेश जी के आठ स्वयंभू (स्वयं प्रकट) मंदिर हैं। ये आठ मंदिर हैं: मोरगांव (मोरेश्वर), सिद्धटेक (सिद्धिविनायक), पाली (बल्लाळेश्वर), महड़ (वरदविनायक), थेऊर (चिंतामणि), लेण्याद्री (गिरिजात्मज), ओझर (विघ्नेश्वर) और रांजणगांव (महागणपति)।
महत्व
अष्टविनायक की यात्रा करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा महाराष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक सर्किट है।
वास्तुकला
प्रत्येक मंदिर की अपनी विशेषता है। सभी आठ स्थानों पर गणेश जी की स्वयंभू मूर्तियाँ हैं जो अलग-अलग मुद्राओं और आकारों में हैं।
यहाँ के प्रमुख मंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. अष्टविनायक तीर्थ कहाँ स्थित है?
उ. अष्टविनायक तीर्थ पुणे और आसपास, महाराष्ट्र में स्थित है।
प्र. अष्टविनायक तीर्थ में दर्शन का समय क्या है?
उ. प्रातः 5 बजे से रात 10 बजे तक (मंदिर के अनुसार भिन्न)
प्र. अष्टविनायक तीर्थ जाने का सबसे अच्छा समय कब है?
उ. गणेश चतुर्थी (सितंबर), बुधवार और अक्टूबर से मार्च
प्र. अष्टविनायक तीर्थ का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उ. अष्टविनायक की यात्रा करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा महाराष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक सर्किट है।
प्र. अष्टविनायक तीर्थ में किस देवता की पूजा होती है?
उ. अष्टविनायक तीर्थ में गणेश (Ganesha) की पूजा होती है।
प्र. अष्टविनायक तीर्थ में कौन से त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं?
उ. गणेश चतुर्थी के समय अष्टविनायक तीर्थ में विशेष पूजा और भारी भीड़ होती है।

