इतिहास
द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका में स्थित है। मूल मंदिर का निर्माण कृष्ण जी के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था, जिसे बाद में कई बार पुनर्निर्मित किया गया। यह चार धाम और सप्त पुरियों में से एक है।
महत्व
द्वारकाधीश मंदिर को "जगत मंदिर" भी कहा जाता है। यहाँ कृष्ण जी राजा के रूप में द्वारकाधीश स्वरूप में पूजे जाते हैं। यह मंदिर चार धामों में से एक और भगवद गीता की भूमि गुजरात का प्रमुख तीर्थ है।
वास्तुकला
मंदिर पाँच मंजिला है और 72 स्तंभों पर टिका है। शिखर पर विशाल ध्वजा लगी है जो दिन में कई बार बदली जाती है। मंदिर में स्वर्ग द्वार और मोक्ष द्वार नामक दो प्रवेश द्वार हैं।
यहाँ के प्रमुख मंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. द्वारकाधीश मंदिर कहाँ स्थित है?
उ. द्वारकाधीश मंदिर द्वारका, गुजरात में स्थित है।
प्र. द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
उ. प्रातः 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक
प्र. द्वारकाधीश मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कब है?
उ. जन्माष्टमी पर विशेष और अक्टूबर से मार्च
प्र. द्वारकाधीश मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उ. द्वारकाधीश मंदिर को "जगत मंदिर" भी कहा जाता है। यहाँ कृष्ण जी राजा के रूप में द्वारकाधीश स्वरूप में पूजे जाते हैं। यह मंदिर चार धामों में से एक और भगवद गीता की भूमि गुजरात का प्रमुख तीर्थ है।
प्र. द्वारकाधीश मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?
उ. द्वारकाधीश मंदिर में कृष्ण (Krishna) की पूजा होती है।
प्र. द्वारकाधीश मंदिर में कौन से त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं?
उ. जन्माष्टमी के समय द्वारकाधीश मंदिर में विशेष पूजा और भारी भीड़ होती है।

