भाई दूज 2026 तिथि और मुहूर्त
📅 11 नवंबर 2026, बुधवार
- • कार्तिक शुक्ल द्वितीया — तिलक अपराह्न काल (दोपहर) में करना शुभ
- • द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर से शुरू होने के कारण कुछ पंचांगों में 10 नवंबर भी दिया गया है
मुहूर्त का समय शहर के अनुसार बदलता है — सटीक समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।
कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव की पुत्री यमुना अपने भाई यमराज को बार-बार अपने घर बुलाती थीं, पर यमराज व्यस्त रहते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अचानक बहन के घर पहुँचे। यमुना ने प्रसन्न होकर भाई का तिलक किया, आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया। प्रसन्न यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर तिलक कराएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। एक अन्य कथा के अनुसार, नरकासुर का वध करके लौटे श्री कृष्ण का उनकी बहन सुभद्रा ने इसी दिन तिलक करके स्वागत किया था।
महत्व
भाई दूज दीपावली पर्व का अंतिम दिन है और भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती है, और भाई बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा का वचन देता है। इस दिन यमुना में स्नान का भी विशेष महत्व है।
पूजा विधि
बहन प्रातःकाल स्नान करके पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और नारियल रखें
भाई को आसन पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं
भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएं
भाई की आरती उतारें और उसके हाथ में कलावा बाँधें
भाई को मिठाई खिलाएं और उसकी लंबी आयु की कामना करें
भाई बहन के घर भोजन करे और बहन को उपहार दे
संभव हो तो यमुना स्नान करें और यमराज व यमुना जी का स्मरण करें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
इस पर्व से जुड़े मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. भाई दूज 2026 कब है?
उ. भाई दूज 2026 में 11 नवंबर 2026, बुधवार को है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया — तिलक अपराह्न काल (दोपहर) में करना शुभ। द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर से शुरू होने के कारण कुछ पंचांगों में 10 नवंबर भी दिया गया है।
प्र. भाई दूज का महत्व क्या है?
उ. भाई दूज दीपावली पर्व का अंतिम दिन है और भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती है, और भाई बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा का वचन देता है। इस दिन यमुना में स्नान का भी विशेष महत्व है।
प्र. भाई दूज की पूजा विधि क्या है?
उ. बहन प्रातःकाल स्नान करके पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और नारियल रखें फिर, भाई को आसन पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं फिर, भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएं।
प्र. भाई दूज पर कौन से मंत्र जपें?
उ. भाई दूज पर गायत्री मंत्र, ॐ मंत्र का जाप करना शुभ है।
