कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर)

छठ पूजा

Chhath Puja

कथा

छठ पूजा कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष षष्ठी को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान राम 14 वर्ष का वनवास समाप्त करके अयोध्या लौटे, तब माता सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य भगवान की उपासना की और सप्तमी को उदित सूर्य को अर्घ्य दिया। एक अन्य मान्यता के अनुसार, महाभारत में जब पांडव जुए में सर्वस्व हार गए, तब द्रौपदी ने इसी व्रत से सूर्यदेव की उपासना की थी। छठ पूजा में सूर्यदेव की बहन षष्ठी माता की विशेष पूजा होती है।

महत्व

छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पर्व है। यह एकमात्र वैदिक पर्व है जिसमें अस्त होते और उदय होते सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है। यह पर्व पर्यावरण के प्रति सम्मान और सूर्य की उपासना का अद्भुत संगम है।

पूजा विधि

  1. नहाय-खाय: पहले दिन गंगा स्नान करके शुद्ध भोजन बनाएं

  2. खरना: दूसरे दिन निर्जल व्रत रखें और संध्या को गुड़ की खीर बनाएं

  3. संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन शाम को अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य दें

  4. उषा अर्घ्य: चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दें

  5. पूजा में सूप में ठेकुआ, फल, नारियल, अदरक, गन्ना, मीठे चावल रखें

  6. सूर्य को जल और दूध मिश्रित अर्घ्य दें

  7. व्रत का समापन प्रसाद वितरण और परायण से करें

संबंधित देवी-देवता

इस पर्व के मंत्र

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