दशहरा (विजयदशमी) 2026 तिथि और मुहूर्त
📅 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार
- • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:00 से 2:46 बजे तक (दिल्ली)
- • अपराह्न पूजा समय: दोपहर 1:14 से 3:32 बजे तक
- • दशमी तिथि: 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 बजे से 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे तक
मुहूर्त का समय शहर के अनुसार बदलता है — सटीक समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।
कथा
आश्विन माह की शुक्ल पक्ष दशमी को दशहरा मनाया जाता है। रामायण के अनुसार, लंकापति रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। भगवान राम ने हनुमान जी, सुग्रीव और वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की। युद्ध से पहले राम जी ने माँ दुर्गा की आराधना की और दसवें दिन रावण का वध करके धर्म की विजय स्थापित की। एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन माँ दुर्गा ने नौ दिनों के युद्ध के बाद महिषासुर का वध किया था, इसलिए इसे विजयदशमी कहते हैं।
महत्व
दशहरा असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह शारदीय नवरात्रि के बाद दसवें दिन आता है। इस दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होता है और जगह-जगह रामलीला का मंचन होता है। विजयदशमी को कोई भी नया कार्य शुरू करने के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान करके भगवान राम और माँ दुर्गा की पूजा करें
शस्त्र पूजा करें: घर के औजार, वाहन और शस्त्रों पर तिलक लगाकर पूजन करें
शमी वृक्ष की पूजा करें और शमी पत्र एक-दूसरे को भेंट करें
अपराजिता देवी की पूजा करके विजय की कामना करें
राम रक्षा स्तोत्र और सुंदरकांड का पाठ करें
संध्या समय रावण दहन देखें और रामलीला में भाग लें
बड़ों का आशीर्वाद लें और मिठाई बाँटें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
राम नाम
Ram Naamश्री राम जय राम जय जय राम राम राम राम राम राम राम राम राम नाम तारक मंत्र ॐ श्री रामाय नमः
मोक्ष, पाप नाश और राम जी की परम कृपा प्राप्ति के लिए
राम रक्षा स्तोत्र
Ram Raksha Stotraचरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्। एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥ ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थम्। पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्॥ राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥
भगवान राम के नाम से सर्वांगीण रक्षा और कवच प्राप्ति
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र
Mahishasura Mardini Stotraअयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते। भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शंकरतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते। दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥
माँ दुर्गा की असुर नाशक शक्ति का आह्वान और नकारात्मकता का नाश
इस पर्व से जुड़े मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. दशहरा (विजयदशमी) 2026 कब है?
उ. दशहरा (विजयदशमी) 2026 में 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को है। विजय मुहूर्त: दोपहर 2:00 से 2:46 बजे तक (दिल्ली)। अपराह्न पूजा समय: दोपहर 1:14 से 3:32 बजे तक। दशमी तिथि: 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 बजे से 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे तक।
प्र. दशहरा (विजयदशमी) का महत्व क्या है?
उ. दशहरा असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह शारदीय नवरात्रि के बाद दसवें दिन आता है। इस दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होता है और जगह-जगह रामलीला का मंचन होता है। विजयदशमी को कोई भी नया कार्य शुरू करने के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
प्र. दशहरा (विजयदशमी) की पूजा विधि क्या है?
उ. प्रातःकाल स्नान करके भगवान राम और माँ दुर्गा की पूजा करें फिर, शस्त्र पूजा करें: घर के औजार, वाहन और शस्त्रों पर तिलक लगाकर पूजन करें फिर, शमी वृक्ष की पूजा करें और शमी पत्र एक-दूसरे को भेंट करें।
प्र. दशहरा (विजयदशमी) पर कौन से मंत्र जपें?
उ. दशहरा (विजयदशमी) पर राम नाम, राम रक्षा स्तोत्र, महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का जाप करना शुभ है।
