कथा
महाशिवरात्रि फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक पौराणिक कथा के अनुसार, शिव जी ने इस रात समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पीया था और ब्रह्मांड की रक्षा की थी। एक अन्य कथा के अनुसार, एक शिकारी इस रात जंगल में फँस गया और बेल के पेड़ पर शिवलिंग के ऊपर अनजाने में जल और बेलपत्र गिराता रहा। इस अनजाने पूजा से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
महत्व
महाशिवरात्रि वर्ष की सबसे बड़ी शिव पूजा है। इस रात जागरण और उपवास से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह तांत्रिक और योगिक साधना के लिए भी विशेष रात्रि है।
पूजा विधि
प्रातःकाल उठकर स्नान करें और उपवास का संकल्प लें
शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से अभिषेक करें
बेलपत्र, धतूरा, आक और भाँग शिवलिंग पर चढ़ाएं
शिव जी को चंदन, कुमकुम और भस्म से श्रृंगार करें
दीपक और धूप जलाकर शिव आरती करें
रात्रि के चारों प्रहर में पूजा और जागरण करें
अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराके उपवास खोलें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
ॐ नमः शिवाय
Om Namah Shivayaॐ नमः शिवाय
भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
Mahamrityunjaya Mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मृत्यु, रोग और संकट से रक्षा के लिए महाशक्तिशाली मंत्र
शिव पंचाक्षर मंत्र
Shiva Panchakshara Mantraनमः शिवाय नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥ शिवाय गौरीवदनाब्जबृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशाय त्रिपुरान्तकाय। झर्झरिभूतविभवाय तनूनपाते तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥ वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥ यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥
शिव जी की पंचतत्व शक्ति को जागृत करने और मोक्ष प्राप्ति के लिए
इस पर्व से जुड़े मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. महाशिवरात्रि कब मनाया जाता है?
उ. महाशिवरात्रि फाल्गुन (फरवरी-मार्च) माह में मनाया जाता है।
प्र. महाशिवरात्रि का महत्व क्या है?
उ. महाशिवरात्रि वर्ष की सबसे बड़ी शिव पूजा है। इस रात जागरण और उपवास से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह तांत्रिक और योगिक साधना के लिए भी विशेष रात्रि है।
प्र. महाशिवरात्रि की पूजा विधि क्या है?
उ. प्रातःकाल उठकर स्नान करें और उपवास का संकल्प लें फिर, शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से अभिषेक करें फिर, बेलपत्र, धतूरा, आक और भाँग शिवलिंग पर चढ़ाएं।
प्र. महाशिवरात्रि पर कौन से मंत्र जपें?
उ. महाशिवरात्रि पर ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र, शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करना शुभ है।
