
सोमनाथ मंदिर
प्रभास पाटण, वेरावल, गुजरात
इतिहास
सोमनाथ मंदिर को "पहला ज्योतिर्लिंग" कहा जाता है। इसे चंद्रमा (सोम) ने शिव जी के क्रोध से मुक्ति के लिए बनवाया था। इस मंदिर को महमूद गजनवी ने 1026 में, अलाउद्दीन खिलजी ने 1299 में और औरंगजेब ने 1665 में तोड़ा। सरदार पटेल के नेतृत्व में 1951 में आधुनिक मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ।
महत्व
सोमनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। यह अरब सागर के तट पर स्थित है। यहाँ से दक्षिण में सीधा अंटार्कटिका तक कोई भूमि नहीं है। चंद्रमा ने यहाँ तप करके शाप से मुक्ति पाई थी।
वास्तुकला
वर्तमान मंदिर चालुक्य शैली में निर्मित है। मंदिर में भव्य शिखर है और गर्भगृह में दिव्य ज्योतिर्लिंग स्थापित है। मंदिर के बाण स्तंभ पर लिखा है कि इससे दक्षिण में केवल समुद्र है।
यहाँ के प्रमुख मंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
उ. सोमनाथ मंदिर प्रभास पाटण, वेरावल, गुजरात में स्थित है।
प्र. सोमनाथ मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
उ. प्रातः 6 बजे से रात 9 बजे तक। आरती: 7, 12 और 7 बजे।
प्र. सोमनाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कब है?
उ. अक्टूबर से मार्च (सर्दी का मौसम) और महाशिवरात्रि पर
प्र. सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उ. सोमनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। यह अरब सागर के तट पर स्थित है। यहाँ से दक्षिण में सीधा अंटार्कटिका तक कोई भूमि नहीं है। चंद्रमा ने यहाँ तप करके शाप से मुक्ति पाई थी।
प्र. सोमनाथ मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?
उ. सोमनाथ मंदिर में शिव (Shiva) की पूजा होती है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
प्र. सोमनाथ मंदिर में कौन से त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं?
उ. महाशिवरात्रि, सावन (श्रावण) के समय सोमनाथ मंदिर में विशेष पूजा और भारी भीड़ होती है।
