
🛕 ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ मंदिर
प्रभास पाटण, वेरावल, गुजरात
इतिहास
सोमनाथ मंदिर को "पहला ज्योतिर्लिंग" कहा जाता है। इसे चंद्रमा (सोम) ने शिव जी के क्रोध से मुक्ति के लिए बनवाया था। इस मंदिर को महमूद गजनवी ने 1026 में, अलाउद्दीन खिलजी ने 1299 में और औरंगजेब ने 1665 में तोड़ा। सरदार पटेल के नेतृत्व में 1951 में आधुनिक मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ।
महत्व
सोमनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। यह अरब सागर के तट पर स्थित है। यहाँ से दक्षिण में सीधा अंटार्कटिका तक कोई भूमि नहीं है। चंद्रमा ने यहाँ तप करके शाप से मुक्ति पाई थी।
वास्तुकला
वर्तमान मंदिर चालुक्य शैली में निर्मित है। मंदिर में भव्य शिखर है और गर्भगृह में दिव्य ज्योतिर्लिंग स्थापित है। मंदिर के बाण स्तंभ पर लिखा है कि इससे दक्षिण में केवल समुद्र है।
