पौष (जनवरी)

मकर संक्रांति

Makar Sankranti

कथा

मकर संक्रांति प्रतिवर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यह सूर्य का उत्तरायण होने का दिन है। महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के लिए उत्तरायण का इंतजार किया था क्योंकि इस दिन मृत्यु को प्राप्त होने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि के यहाँ जाते हैं।

महत्व

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का सूर्य को समर्पित प्रमुख पर्व है। पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, आंध्र प्रदेश में संक्रांति के नाम से यही पर्व मनाया जाता है। गंगा सागर का मेला भी इसी दिन लगता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।

पूजा विधि

  1. प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी में स्नान करें

  2. उगते सूर्य को अर्घ्य दें: तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और कुमकुम मिलाकर

  3. सूर्य नमस्कार के साथ गायत्री मंत्र का जप करें

  4. तिल और गुड़ का भोग सूर्यदेव को अर्पित करें

  5. तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी बनाएं

  6. ब्राह्मणों को तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करें

  7. पतंग उड़ाने की परंपरा और परिवार के साथ मिलकर उत्सव मनाएं

संबंधित देवी-देवता

इस पर्व के मंत्र

इस पर्व से जुड़े मंदिर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. मकर संक्रांति कब मनाया जाता है?

उ. मकर संक्रांति पौष (जनवरी) माह में मनाया जाता है।

प्र. मकर संक्रांति का महत्व क्या है?

उ. मकर संक्रांति हिंदू धर्म का सूर्य को समर्पित प्रमुख पर्व है। पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, आंध्र प्रदेश में संक्रांति के नाम से यही पर्व मनाया जाता है। गंगा सागर का मेला भी इसी दिन लगता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।

प्र. मकर संक्रांति की पूजा विधि क्या है?

उ. प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी में स्नान करें फिर, उगते सूर्य को अर्घ्य दें: तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और कुमकुम मिलाकर फिर, सूर्य नमस्कार के साथ गायत्री मंत्र का जप करें।

प्र. मकर संक्रांति पर कौन से मंत्र जपें?

उ. मकर संक्रांति पर गायत्री मंत्र, ॐ मंत्र का जाप करना शुभ है।