कथा
श्रावण माह भगवान शिव का सबसे प्रिय माह है। पौराणिक मान्यता है कि इसी माह समुद्र मंथन हुआ था और शिव जी ने हलाहल विष पीया था। उस समय जो जल उनके शरीर पर पड़ा उससे उन्हें शीतलता मिली, इसलिए इस माह में जल अभिषेक का विशेष महत्व है।
महत्व
सावन माह के प्रत्येक सोमवार को शिव जी की विशेष पूजा होती है। कंवड़ यात्रा इसी माह में होती है जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेकर शिव मंदिरों में अभिषेक करने जाते हैं।
पूजा विधि
प्रत्येक सोमवार को उपवास रखें
शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें
बेलपत्र, धतूरा और भाँग शिव जी को चढ़ाएं
ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें
शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें
सावन के प्रत्येक सोमवार को 16 सोमवार व्रत के रूप में मनाएं
शिव मंदिर में दर्शन और कांवड़ यात्रा करें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
ॐ नमः शिवाय
Om Namah Shivayaॐ नमः शिवाय
भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
Mahamrityunjaya Mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मृत्यु, रोग और संकट से रक्षा के लिए महाशक्तिशाली मंत्र
शिव पंचाक्षर मंत्र
Shiva Panchakshara Mantraनमः शिवाय नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥ शिवाय गौरीवदनाब्जबृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशाय त्रिपुरान्तकाय। झर्झरिभूतविभवाय तनूनपाते तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥ वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥ यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥
शिव जी की पंचतत्व शक्ति को जागृत करने और मोक्ष प्राप्ति के लिए
