श्रावण (जुलाई-अगस्त)

सावन (श्रावण)

Sawan Month

कथा

श्रावण माह भगवान शिव का सबसे प्रिय माह है। पौराणिक मान्यता है कि इसी माह समुद्र मंथन हुआ था और शिव जी ने हलाहल विष पीया था। उस समय जो जल उनके शरीर पर पड़ा उससे उन्हें शीतलता मिली, इसलिए इस माह में जल अभिषेक का विशेष महत्व है।

महत्व

सावन माह के प्रत्येक सोमवार को शिव जी की विशेष पूजा होती है। कंवड़ यात्रा इसी माह में होती है जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेकर शिव मंदिरों में अभिषेक करने जाते हैं।

पूजा विधि

  1. प्रत्येक सोमवार को उपवास रखें

  2. शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें

  3. बेलपत्र, धतूरा और भाँग शिव जी को चढ़ाएं

  4. ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें

  5. शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें

  6. सावन के प्रत्येक सोमवार को 16 सोमवार व्रत के रूप में मनाएं

  7. शिव मंदिर में दर्शन और कांवड़ यात्रा करें

संबंधित देवी-देवता

इस पर्व के मंत्र

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

ॐ नमः शिवाय

भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र

Mahamrityunjaya Mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मृत्यु, रोग और संकट से रक्षा के लिए महाशक्तिशाली मंत्र

शिव पंचाक्षर मंत्र

Shiva Panchakshara Mantra

नमः शिवाय नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥ शिवाय गौरीवदनाब्जबृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशाय त्रिपुरान्तकाय। झर्झरिभूतविभवाय तनूनपाते तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥ वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥ यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥

शिव जी की पंचतत्व शक्ति को जागृत करने और मोक्ष प्राप्ति के लिए

इस पर्व से जुड़े मंदिर