राजा के तीन प्रश्न
सबसे सही समय कौन सा है? सबसे ज़रूरी व्यक्ति कौन है? सबसे ज़रूरी काम क्या है? एक राजा को इनके उत्तर एक साधु की कुटिया में मिले।
एक राजा को लगता था कि यदि उसे तीन प्रश्नों के उत्तर मिल जाएँ, तो वह कभी असफल नहीं होगा: कोई काम करने का सबसे सही समय कौन सा है? सबसे ज़रूरी व्यक्ति कौन है? और सबसे ज़रूरी काम क्या है?
दरबार के विद्वानों ने अलग-अलग उत्तर दिए, पर राजा संतुष्ट नहीं हुआ। तब उसने सुना कि जंगल में एक ज्ञानी साधु रहते हैं। राजा साधारण वेश में अकेला उनके पास पहुँचा।
साधु अपनी कुटिया के बाहर क्यारी खोद रहे थे। वे बूढ़े थे और थक रहे थे। राजा ने अपने प्रश्न पूछे, पर साधु ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा ने उनकी थकान देखकर कुदाल ले ली और खुद खोदने लगा। घंटों बीत गए।
शाम को जंगल से एक घायल आदमी दौड़ता हुआ आया, जिसके पेट से खून बह रहा था। राजा ने उसका घाव धोया, अपने वस्त्र फाड़कर पट्टी बाँधी, पानी पिलाया और रात भर उसकी सेवा की।
सुबह घायल आदमी ने आँखें खोलीं और रोते हुए बोला, "राजन, मुझे क्षमा करें। मैं आपका शत्रु हूँ। आपने मेरे भाई को दंड दिया था, इसलिए मैं आपको मारने के लिए घात लगाए बैठा था। आपके सैनिकों ने मुझे पहचानकर घायल कर दिया। आपने मेरी जान बचाई। अब मैं जीवन भर आपकी सेवा करूँगा।"
राजा ने साधु से फिर पूछा। साधु मुस्कुराए, "तुम्हें उत्तर मिल चुके हैं। यदि कल तुम मुझ पर दया करके क्यारी न खोदते और लौट जाते, तो वह आदमी तुम पर हमला कर देता। इसलिए सबसे ज़रूरी समय वह था जब तुम खोद रहे थे, सबसे ज़रूरी व्यक्ति मैं था, और सबसे ज़रूरी काम मेरी मदद करना था। फिर, जब वह आदमी आया, तो वही सबसे ज़रूरी व्यक्ति था और उसकी सेवा सबसे ज़रूरी काम।"
"याद रखो: सबसे ज़रूरी समय 'अभी' है, क्योंकि केवल यही हमारे हाथ में है। सबसे ज़रूरी व्यक्ति वह है जो इस समय तुम्हारे सामने है। और सबसे ज़रूरी काम है उसका भला करना।"
