📖 कथा सागर
भक्ति कथाएँ
पुराणों, रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषदों और संतों की वे कथाएँ जो पीढ़ियों से हमें राह दिखाती आई हैं। कोई बुकिंग नहीं, कोई लॉग-इन नहीं: बस पढ़िए और मन में उतारिए।
30 कथाएँ
दामोदर: जब यशोदा की रस्सी हर बार दो उंगल छोटी पड़ी
माखन चुराकर भागे नन्हे कान्हा को माँ यशोदा ने ओखल से बाँधना चाहा, पर रस्सी हर बार छोटी पड़ जाती थी। क्यों?
पढ़ें →सुदामा के मुट्ठी भर चावल
फटे वस्त्रों में द्वारका पहुँचे निर्धन मित्र की पोटली में बस थोड़े से चावल थे। द्वारकाधीश ने उनका मोल कैसे चुकाया?
पढ़ें →गोवर्धन धारण: सात दिन तक उंगली पर पर्वत
इंद्र की पूजा रोककर कान्हा ने गोवर्धन पूजन कराया। क्रोधित इंद्र ने मूसलाधार वर्षा भेजी। तब नन्हे कृष्ण ने क्या किया?
पढ़ें →अर्जुन का विषाद: जब महायोद्धा के हाथ से गांडीव छूट गया
कुरुक्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच खड़े अर्जुन ने अपनों को सामने देखा और धनुष रख दिया। यहीं से गीता का जन्म हुआ।
पढ़ें →कर्मण्येवाधिकारस्ते: कर्म पर अधिकार, फल पर नहीं
गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक हमें फल की चिंता छोड़कर कर्म करने को कहता है। पर क्या इसका अर्थ है कि परिणाम की परवाह ही न करें?
पढ़ें →स्थितप्रज्ञ कौन है?
अर्जुन ने पूछा, जिसकी बुद्धि स्थिर हो, वह कैसे बोलता, बैठता और चलता है? श्रीकृष्ण का उत्तर आज भी मन की शांति का सूत्र है।
पढ़ें →ध्रुव: पाँच वर्ष का बालक और अटल तारा
पिता की गोद से उतार दिए गए बालक ध्रुव ने वन में जाकर ऐसी तपस्या की कि भगवान स्वयं प्रकट हुए।
पढ़ें →प्रह्लाद और नरसिंह: खंभे से प्रकट हुए भगवान
जिस पिता ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया, उसी के घर जन्मे बालक ने 'नारायण' कहना नहीं छोड़ा।
पढ़ें →गजेंद्र मोक्ष: जब सरोवर में फँसे हाथी ने पुकारा
हज़ार वर्ष तक मगरमच्छ से लड़ते-लड़ते जब गजराज का बल टूट गया, तब उसने एक कमल उठाकर भगवान को पुकारा।
पढ़ें →शबरी के जूठे बेर
वर्षों तक श्रीराम की राह देखती वृद्धा शबरी ने हर बेर चखकर केवल मीठे बेर रखे। प्रभु ने वही प्रेम से खाए।
पढ़ें →रामसेतु की नन्ही गिलहरी
जब वानर सेना विशाल पत्थरों से सेतु बना रही थी, तब एक गिलहरी अपनी पीठ पर रेत ढो रही थी। श्रीराम ने उसे क्या दिया?
पढ़ें →हनुमान और संजीवनी: जब पूरा पर्वत उठा लाए
लक्ष्मण मूर्छित थे और सूर्योदय से पहले संजीवनी चाहिए थी। हनुमान जी जड़ी पहचान न पाए, तो उन्होंने क्या किया?
पढ़ें →🪔 कथा पढ़ी, अब एक दीप जलाएँ
पवित्र घाट पर आपके नाम से दीपदान, और उसका वीडियो सीधे व्हाट्सऐप पर।
