⚔️ महाभारतपूरी कथा · 2 मिनट पढ़ें

यक्ष प्रश्न: युधिष्ठिर के उत्तर जिन्होंने भाइयों को जीवन दिया

प्यासे पांडव एक सरोवर पर पहुँचे और एक-एक कर मूर्छित हो गए। युधिष्ठिर ने पानी पीने से पहले यक्ष के प्रश्नों का उत्तर दिया।

वनवास के दिनों में एक ब्राह्मण की अरणि (यज्ञ की लकड़ी) एक हिरण उठा ले गया। पांडव उसका पीछा करते-करते बहुत दूर निकल गए और प्यास से व्याकुल हो गए। युधिष्ठिर ने नकुल को पानी ढूँढने भेजा।

नकुल को एक सुंदर सरोवर मिला। जैसे ही उसने पानी पीना चाहा, एक आवाज़ आई, "पहले मेरे प्रश्नों के उत्तर दो, फिर पानी पीना।" प्यासे नकुल ने बात अनसुनी की और पानी पीते ही मूर्छित हो गए। यही सहदेव, अर्जुन और भीम के साथ हुआ।

अंत में युधिष्ठिर पहुँचे। भाइयों को निष्प्राण देखकर भी उन्होंने धैर्य रखा। आवाज़ ने कहा, "मैं यक्ष हूँ, मेरे प्रश्नों का उत्तर दो।" युधिष्ठिर ने विनम्रता से कहा, "पूछिए, मैं अपनी बुद्धि के अनुसार उत्तर दूँगा।"

यक्ष ने पूछा, "पृथ्वी से भारी क्या है?" युधिष्ठिर बोले, "माता।" "आकाश से ऊँचा क्या है?" "पिता।" "हवा से तेज़ क्या है?" "मन।" "सबसे बड़ा धन क्या है?" "संतोष।" "मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु?" "क्रोध।"

फिर यक्ष ने पूछा, "संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?" युधिष्ठिर ने कहा:

अहन्यहनि भूतानि गच्छन्तीह यमालयम्।शेषाः स्थावरमिच्छन्ति किमाश्चर्यमतः परम्॥

"हर दिन प्राणी मृत्यु को प्राप्त होते हैं, फिर भी बचे हुए लोग ऐसे जीते हैं मानो वे सदा रहेंगे। इससे बड़ा आश्चर्य क्या होगा?"

प्रसन्न यक्ष ने कहा, "तुम्हारे एक भाई को जीवित कर सकता हूँ, किसे चुनोगे?" युधिष्ठिर ने नकुल को चुना। यक्ष चकित हुआ, "भीम और अर्जुन जैसे वीरों को छोड़कर नकुल क्यों?" युधिष्ठिर बोले, "मेरे पिता की दो पत्नियाँ थीं। कुंती का एक पुत्र, मैं, जीवित हूँ। माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहना चाहिए।"

यह सुनकर यक्ष ने अपना असली रूप दिखाया। वे स्वयं धर्मराज थे। उन्होंने चारों भाइयों को जीवित कर दिया।

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