
त्र्यंबकेश्वर मंदिर
त्र्यंबकेश्वर, नासिक, महाराष्ट्र
इतिहास
त्र्यंबकेश्वर मंदिर नासिक से 28 किमी दूर ब्रह्मगिरि पर्वत के पास गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है। पेशवा बालाजी बाजीराव ने 1755 में इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया। यहाँ कुशावर्त तीर्थ में गोदावरी का उद्गम होता है।
महत्व
यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों के मुख एक ही लिंग में विद्यमान हैं। यहाँ गोदावरी नदी का उद्गम होता है। सिंहस्थ कुंभ मेला यहाँ और नासिक में लगता है।
वास्तुकला
मंदिर हेमाडपंथी वास्तुशैली में काले पत्थरों से निर्मित है। मंदिर का शिखर बेहद ऊँचा है। गर्भगृह में त्रिमुखी ज्योतिर्लिंग स्थापित है।
यहाँ के प्रमुख मंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. त्र्यंबकेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है?
उ. त्र्यंबकेश्वर मंदिर त्र्यंबकेश्वर, नासिक, महाराष्ट्र में स्थित है।
प्र. त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
उ. प्रातः 5:30 बजे से रात 9 बजे तक
प्र. त्र्यंबकेश्वर मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कब है?
उ. सिंहस्थ कुंभ के अवसर पर और महाशिवरात्रि पर। साधारण यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च।
प्र. त्र्यंबकेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उ. यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों के मुख एक ही लिंग में विद्यमान हैं। यहाँ गोदावरी नदी का उद्गम होता है। सिंहस्थ कुंभ मेला यहाँ और नासिक में लगता है।
प्र. त्र्यंबकेश्वर मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?
उ. त्र्यंबकेश्वर मंदिर में शिव (Shiva) की पूजा होती है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
प्र. त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कौन से त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं?
उ. महाशिवरात्रि, सावन (श्रावण) के समय त्र्यंबकेश्वर मंदिर में विशेष पूजा और भारी भीड़ होती है।
